राफेल मामले को लेकर हुई सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
राफेल डील केंद्र सरकार से जुड़ी एक बहुत बड़ी विवादित डील है । इस दिल को लेकर जारी विवाद के बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा केंद्र सरकार मोदी सरकार से खरीद प्रक्रिया की पूरी जानकारी मांगी है ।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि केंद्र सरकार उस फैसले की प्रक्रिया के डिटेल को सुव्यवस्थित रूप से देने का कष्ट करें जिसके बाद राफेल जेट की खरीद को लेकर फ्रांस की कंपनी दैसॉ एविएशन से डील फाइनल हुई थी ।
गौरतलब है कि विपक्षी पार्टी मोदी सरकार पर हमेशा राफेल डील के कीमतों को लेकर गंभीर आरोप लगाती रही है और इस आरोपों के तहत ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है । अब इस मामले पर सुनवाई 29 अक्टूबर को की जाएगी ।
राफेल डील से संबंधित मामले पर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बिना किसी प्रकार का नोटिस जारी किए हुए केंद्र केंद्र सरकार से रिपोर्ट तलब की । चीफ जस्टिस रंजन गोगोई , जस्टिस एस के कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने केंद्र सरकार को साफ तौर पर बताया है कि सुप्रीम कोर्ट डिफेंस फोर्सेस को लेकर के राफेल विमानों की उपयोगिता पर किसी भी प्रकार का कोई राय नहीं दे रही है ।
बेंच ने राफेल डील के मामले में कहा कि वह सरकार को कोई नोटिस जारी नहीं कर रहे हैं । वह केवल फैसला लेने की प्रक्रिया की वैधता से संतुष्ट होना चाहते हैं । बेंच ने राफेल जेट के बारे में यह भी कहा कि उन्हें रिपोर्ट में राफेल डील की तकनीकी डिटेल्स और मॉडल के बारे में कोई सूचना नहीं नहीं चाहिए ।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार राफेल डील पर दायर की गई याचिका को रद्द करने की मांग कर रही है । केंद्र सरकार ने यह कहा है कि राजनीतिक फायदा के लिए राफेल मुद्दे पर याचिका दायर की गई है । सुप्रीम कोर्ट का निर्देश राफेल डील के मुद्दे पर इस समय आया है कि जब रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण फ्रांस के लिए रवाना हो रही है ।
विपक्षी पार्टी कांग्रेस राफेल डील के मामले में बहुत बड़ी अनियमितता का आरोप लगा रही है । कांग्रेस का कहना है कि सरकार 1670 करोड रुपए प्रति राफेल की दर से विमान खरीद रही है जबकि पिछले कांग्रेस सरकार के दौरान इसका दाम केवल ₹526 करोड़ तय किया गया था ।

